उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी को मिला नया कुलपति, प्रोफेसर लोहनी संभालेंगे जिम्मेदारी – News Hunts

उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी को मिला नया कुलपति, प्रोफेसर लोहनी संभालेंगे जिम्मेदारी

[ad_1]

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी को नया कुलपति मिल गया है. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह की संस्तुति के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सेवारत हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्ति किया गया है.

बुधवार 23 जुलाई को राजभवन से जारी पत्र के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिनियमावली-2009 के तहत गठित अन्वेषण समिति द्वारा प्रस्तुत पैनल में से चयन करते हुए कुलाधिपति राज्यपाल गुरमीत सिंह की संस्तुति के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के सीनियर प्रोफेसर और हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन चंद्र लोहनी को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी) का नया कुलपति नियुक्ति किया गया. पत्र में बताया गया है कि प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के कुलपति के तौर पर पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले 3 वर्ष की अवधि या अग्रेत्तर आदेश तक, जो भी पहले हो, तक के लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी का कुलपति नियुक्ति जाता है.

प्रोफेसर लोहनी वर्तमान में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में हिंदी विभाग के प्रमुख हैं. उन्होंने ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डी. फिल हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से की है. प्रो. लोहनी द्वारा हिंदी साहित्य से जुड़ी हुईं 23 किताबें लिखी गई हैं. यही नहीं, उनके 7 से ज्यादा शोध पत्र भी विभिन्न साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं.

प्रोफेसर लोहनी मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पचार गांव के रहने वाले हैं. वह स्विट्जरलैंड के मशहूर विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं. साथ ही यूनिवर्सिटी शंघाई में भी विजिटिंग प्रोफेसर रह चुके हैं. प्रोफेसर लोहनी को चीनी साहित्य की भी गहरी समझ है. शिक्षा जगत में प्रो. लोहनी को शैक्षिक प्रशासक के रूप में जाना जाता है.

बता दें कि प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी से पहले उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे प्रोफेसर ओम प्रकाश नेगी डेढ़ साल पहले सेवानिवृत हो चुके थे. जहां तीन बार से उनका कार्यकाल बढ़ रहा था. प्रोफेसर नेगी को तीन बार एक्सटेंशन मिलने के बाद सरकार नई कुलपति की तलाश में लगी हुई थी. इसके बाद राज्यपाल ने कुलपति का अनुमोदन किया है. उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.






[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *