उत्तराखंड से संबंध रखने वाली इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आतंकी कनेक्शन के बारे में सामने आ रही है। जिसको देखते हुए हम आपको यही सलाह देंगे कि घर दुकान में वर्कर रखने या मजदूरी कराने से पहले एक बार उनका पुलिस सत्यापन अवश्य करवा लें। दरअसल उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्धों में उत्तराखण्ड से जुड़े दो लोग मजदूरी का काम करने वाले बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक ये सभी आरोपी पाकिस्तान से संचालित आतंकी मॉड्यूल के संपर्क में थे और देश के संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों में दो उत्तराखंड से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों की गतिविधियां लंबे समय से निगरानी में थीं। पूछताछ में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि संदिग्ध भाजपा कार्यालयों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की रेकी कर रहे थे।
जांच में पता चला है कि आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टरों और आईएसआई एजेंटों के संपर्क में आए थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट वीडियो कॉल और सोशल मीडिया चैट के जरिए इन युवकों को निर्देश दे रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सहारनपुर निवासी महकाब, मुजफ्फरनगर निवासी गगनदीप उर्फ गुरी, देहरादून निवासी शाहरुख और हरिद्वार के रुड़की निवासी मुशर्रफ के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि महकाब और गगनदीप ने ही बाकी दोनों युवकों को इस नेटवर्क से जोड़ा था।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें देश के एक राजनीतिक दल के कार्यालय, अस्पताल और कई स्कूल संचालित करने वाले व्यक्ति को निशाना बनाने के निर्देश मिले थे। एजेंसियों के मुताबिक इन स्थानों की रेकी कर विस्फोट की योजना बनाई जा रही थी। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया कि मार्च 2026 में नोएडा में इन आरोपियों की एक गुप्त बैठक भी हुई थी। इस बैठक में हथियार जुटाने, फंडिंग और नए लोगों को नेटवर्क से जोड़ने पर चर्चा हुई थी।
भारतीय जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान में बैठा गैंगस्टर शहजाद भट्टी अब आतंकी नेटवर्क से जुड़ चुका है। उसे तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) से जुड़े मॉड्यूल का अहम चेहरा माना जा रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पहले भी उसके नेटवर्क को लेकर इनपुट जुटा चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की नई रणनीति अपनाई जा रही है। ऐसे में यह मामला केवल चार युवकों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है।
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा इनके पीछे फंडिंग और संचालन का पूरा तंत्र कहां से संचालित हो रहा था।