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प्राकृतिक सौंदर्य और सुकून देने वाले मौसम के लिए मशहूर मसूरी में इन दिनों एक अनदेखा खतरा मंडरा रहा है. मसूरी में पीलिया (जॉन्डिस) के कई मामले सामने आ रहे हैं. खासकर बच्चों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है.
दरअसल, कुछ हफ्तों से मसूरी के उप जिला चिकित्सालय में रोजाना 6 से 8 मरीज गंभीर पीलिया के लक्षणों के साथ भर्ती हो रहे हैं. इनमें से अधिकांश मरीज बच्चे हैं, जिनके इलाके में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. चिकित्सकों और प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मसूरी में पीलिया का मुख्य कारण दूषित पेयजल है. बरसात के मौसम में जल स्रोतों में गंदगी मिल जाने से संक्रमण फैल रहा है.
उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. खजान सिंह चौहान ने जानकारी दी कि अस्पताल में रोजाना पीलिया से संक्रमित कई मरीज आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे यहां आने वाले मरीजों की जांच के बाद यह साफ हुआ है कि पानी दूषित होने के कारण पीलिया तेजी से फैल रहा है. सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पीलिया सिर्फ आंखों के पीले पड़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर एक गंभीर संक्रमण का संकेत होता है.
डॉक्टरों के अनुसार, पीलिया के प्रमुख लक्षण, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, अत्यधिक थकान और कमजोरी, भूख में कमी या भोजन से अरुचि, मिचली आना या उल्टी होना, पेट के दाईं ओर ऊपरी हिस्से में दर्द, गहरे पीले रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल आदि. यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकती है.
पीलिया मरीजों के मामले सामने आने के बाद सवाल पेयजल आपूर्ति पर उठने लगे हैं. इस पर त्रिपेन सिंह रावत सहायक अभियंता गढ़वाल जल संस्थान मसूरी ने सफाई दी है कि मसूरी के हर इलाके में भेजे जाने वाले पानी की नियमित जांच की जा रही है और फिलहाल पानी की गुणवत्ता मानक के अनुरूप है. हालांकि, कुछ समय पहले मसूरी यमुना पेयजल पंपिंग योजना के तहत आने वाले पानी में गंदगी की शिकायतें मिली थीं. जिनका निस्तारण कर दिया गया है. विभाग ने आश्वस्त किया है कि फिर भी एहतियात के तौर पर हम पानी की एक बार फिर से जांच करवाएंगे, ताकि कोई भी जोखिम न रहे.
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