उत्तराखंड में डॉक्टर और जरूरी दवाओं की भारी कमी, कॉमन रिव्यू मिशन की रिपोर्ट ने खोली पोल – News Hunts

उत्तराखंड में डॉक्टर और जरूरी दवाओं की भारी कमी, कॉमन रिव्यू मिशन की रिपोर्ट ने खोली पोल

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्या हाल हैं, उससे तो सभी वाकिफ हैं. आज भी पहाड़ के ज्यादातर अस्पताल रेफरल सेंटर बने हैं. कहीं डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की कमी है तो कहीं संसाधनों का अभाव. जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. खासकर प्रदेश के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी की मुख्य वजह उनका पहाड़ नहीं चढ़ना है. ऐसे में प्रदेश में मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर स्थिति की पोल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन रिपोर्ट ने खोल दी है.

दरअसल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की 17वीं कॉमन रिव्यू मिशन की रिपोर्ट जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच हुए अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है. रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि उत्तराखंड के प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानक के अनुसार मानव संसाधन की भारी कमी और संरचना का अपर्याप्त इस्तेमाल पाया गया है. जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में काम करने की अनिच्छा के चलते डॉक्टर्स की कमी बनी हुई है. यानी डॉक्टर पहाड़ चढ़ने को राजी नहीं हैं. जिसके चलते पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है. राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स) के अनुरूप कई पद खाली हैं, जिससे सेवाओं की पहुंच और उसकी क्वालिटी प्रभावित हो रही है.

कई तैनात चिकित्सा अधिकारी पोस्ट ग्रेजुएशन का अध्ययन कर रहे हैं. जो अपनी मौजूदा तनख्वाह तो ले रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण के कारण सक्रिय सेवा से अनुपस्थित रहते हैं, जिससे भी मानव संसाधन यानी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ की कमी बनी हुई है. इतना ही नहीं वर्तमान में राज्य में किसी विशेष विशेषज्ञ कैडर का गठन नहीं हुआ है. हालांकि, इसकी योजना बनाई जा रही है.

वहीं, मानव संसाधन स्वास्थ्य सेल (एचआरएच सेल) का गठन किया गया है, लेकिन यहां कार्यक्रम अधिकारी का एक पद खाली है. कार्यस्थल सुरक्षा के लिए यौन उत्पीड़न निवारण समिति (प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी) स्थापित की गई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पदों के लिए कार्य विवरण (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) तैयार हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों को नियमित भर्ती को महत्व नहीं दिया जा रहा है.




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